जरूरतमंद परिवारों के साथ मनाई दीपावली, सोलर लाइटें बांटकर घरों में पहुंचाया उजाला
शिमला। दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस त्योहार की असली सार्थकता जरूरतमंदों के जीवन में खुशियों और उम्मीदों का उजाला पहुंचाने में है। इसी भावना को साकार करते हुए नोफल एक उम्मीद संस्था ने इस वर्ष प्रवासी मजदूरों और जरूरतमंद परिवारों के साथ दीपावली का पर्व मनाया। संस्था के अध्यक्ष गुरमीत सिंह के नेतृत्व में टीम ने बालूगंज, बंगला कॉलोनी तथा टूटू-टुटीकंडी क्रॉसिंग क्षेत्र में रहने वाले गरीब एवं प्रवासी मजदूर परिवारों के बीच पहुंचकर उन्हें दीपावली की खुशियां बांटीं। इस दौरान संस्था की ओर से जरूरतमंद परिवारों को सोलर लाइटें वितरित की गईं, ताकि जिन घरों और झोपड़ियों में रात के समय अंधेरा रहता है, वहां रोशनी की व्यवस्था हो सके।
संस्था की इस पहल से जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। संस्था के सदस्यों ने परिवारों के साथ समय बिताया और उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं। बच्चों की खुशियों का विशेष ध्यान रखते हुए उन्हें मिठाइयां, पटाखे, फुलझड़ियां, दीये और मोमबत्तियां भी वितरित की गईं। संस्था का उद्देश्य था कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी अपने बच्चों के साथ दीपावली का त्योहार पूरे उत्साह और उमंग के साथ मना सकें।
सोलर लाइटें बांटकर दूर किया अंधेरा
इस दीपावली पर संस्था की ओर से वितरित की गई सोलर लाइटें अभियान का मुख्य आकर्षण रहीं। आर्थिक रूप से कमजोर कई परिवारों के लिए रात के समय रोशनी की व्यवस्था करना आसान नहीं होता। ऐसे में सोलर लाइटें उनके लिए बेहद उपयोगी साबित होंगी। लाइटें मिलने पर परिवारों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब उन्हें रात के समय अंधेरे में रहने की परेशानी से काफी राहत मिलेगी।
संस्था के अध्यक्ष गुरमीत सिंह ने कहा कि दीपावली रोशनी का त्योहार है और किसी जरूरतमंद के घर में उजाला पहुंचाने से बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती। संस्था ने इस बार केवल मिठाई और त्योहार का सामान बांटने तक सीमित रहने के बजाय परिवारों की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए उपयोगी सामग्री उपलब्ध करवाने का प्रयास किया है।
उन्होंने बताया कि नोफल एक उम्मीद संस्था पिछले वर्ष भी इन परिवारों के बीच पहुंची थी और उनके साथ दीपावली मनाई थी। उस दौरान परिवारों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को करीब से समझने का अवसर मिला था। विशेष रूप से यह बात सामने आई थी कि कई परिवारों को रात के समय रोशनी की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष सोलर लाइटें वितरित करने का निर्णय लिया गया।
पिछले वर्ष की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया सहयोग
गुरमीत सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष जरूरतमंद परिवारों के बीच जाने पर उन्हें राशन, प्रेशर कुकर और लाइटों जैसी आवश्यक वस्तुओं की जरूरत के बारे में जानकारी मिली थी। संस्था लगातार इन परिवारों की परिस्थितियों को समझने और अपनी क्षमता के अनुसार उनकी मदद करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सेवा का उद्देश्य केवल किसी एक दिन जरूरतमंदों की सहायता करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी वास्तविक समस्याओं को समझकर उन्हें दूर करने की दिशा में प्रयास करना जरूरी है। इसी सोच के साथ संस्था की टीम समय-समय पर जरूरतमंद परिवारों के बीच पहुंचती है और उनकी आवश्यकताओं को जानने का प्रयास करती है।
गुरमीत सिंह ने प्रदेश एवं देशवासियों को छोटी दीपावली और आगामी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीपावली बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। इस पर्व का वास्तविक संदेश समाज में प्रेम, भाईचारे, सद्भावना और मानवता की भावना को मजबूत करना है। यदि किसी जरूरतमंद परिवार के चेहरे पर मुस्कान लाई जा सके और उसके घर में रोशनी पहुंचाई जा सके, तो इससे बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती।
सोलर लाइट मिलने से खिले परिवारों के चेहरे
नोफल एक उम्मीद संस्था की ओर से सोलर लाइटें मिलने पर प्रवासी मजदूर परिवारों में खासा उत्साह देखने को मिला। परिवारों ने संस्था के अध्यक्ष गुरमीत सिंह और उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।
राजस्थान से संबंध रखने वाली सुगना ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस बार की दीपावली उनके लिए बेहद खास रही है। उन्होंने बताया कि सोलर लाइट मिलने से उन्हें बहुत खुशी हुई है। पहले रात के समय घर में अंधेरा रहता था, लेकिन अब सोलर लाइट की मदद से परिवार को काफी सुविधा मिलेगी। उन्होंने इस सहयोग के लिए संस्था का आभार जताया।
वहीं, एक अन्य महिला ने बताया कि पहले उनका परिवार रात के समय अंधेरे में रहता था और बच्चों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। संस्था की ओर से लाइट मिलने के बाद अब उनके घर में उजाला हो गया है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए केवल एक लाइट नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने वाली महत्वपूर्ण सुविधा है। महिला ने संस्था के अध्यक्ष गुरमीत सिंह और उनकी टीम के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।
झाड़ू बनाकर और बेचकर परिवार चलाते हैं प्रवासी मजदूर
इस दौरान कई प्रवासी मजदूर परिवारों ने बताया कि वे झाड़ू बनाने और बेचने का काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके लिए परिवार की जरूरतें पूरी करना आसान नहीं होता। त्योहारों के समय बच्चों के लिए मिठाई, पटाखे और अन्य सामान खरीदना भी कई बार मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में संस्था की ओर से मिठाइयां, पटाखे, फुलझड़ियां, दीये और मोमबत्तियां मिलने से बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने खुशी के साथ दीपावली का सामान लिया, वहीं परिवारों ने संस्था के सदस्यों का धन्यवाद किया।
प्रवासी मजदूरों ने कहा कि संस्था ने दीपावली के अवसर पर उनके साथ केवल सामान ही साझा नहीं किया, बल्कि उन्हें सम्मान, अपनापन और समाज में बराबरी का एहसास भी करवाया है। उनके लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि समाज में ऐसी संस्थाएं और लोग मौजूद हैं, जो उनकी परिस्थितियों को समझते हैं और जरूरत के समय उनके साथ खड़े होते हैं।
त्योहार से आगे सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
गुरमीत सिंह ने कहा कि नोफल एक उम्मीद संस्था का उद्देश्य केवल त्योहारों पर कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है, बल्कि समाज के उन वर्गों तक पहुंचना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिन्हें मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है। संस्था भविष्य में भी इन परिवारों के संपर्क में रहेगी और उनकी समस्याओं एवं जरूरतों को समझते हुए हरसंभव सहयोग करने का प्रयास करेगी।
उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक बदलाव तभी संभव है, जब सक्षम लोग जरूरतमंदों के साथ खड़े हों। किसी जरूरतमंद के घर में छोटी सी सुविधा पहुंचाना भी उसके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। दीपावली के अवसर पर सोलर लाइटें वितरित करने के पीछे भी यही भावना रही है।
नोफल एक उम्मीद संस्था की यह पहल मानवता, सामाजिक सेवा, आपसी सहयोग और संवेदनशीलता की मिसाल बनी। संस्था ने जरूरतमंद परिवारों के घरों में सोलर लाइट के माध्यम से उजाला पहुंचाने के साथ-साथ बच्चों को मिठाइयां, पटाखे, फुलझड़ियां, दीये और मोमबत्तियां देकर उनके त्योहार की खुशियों को भी दोगुना किया।
इस पहल ने समाज को यह संदेश दिया कि दीपावली की असली खुशी केवल अपने घर को सजाने और रोशन करने में नहीं, बल्कि उन घरों तक रोशनी पहुंचाने में है, जहां संसाधनों की कमी के कारण अंधेरा रहता है। जरूरतमंद परिवारों के साथ दीपावली मनाकर नोफल एक उम्मीद संस्था ने साबित किया कि सेवा और सहयोग की एक छोटी सी पहल भी किसी के जीवन में खुशियों और उम्मीदों का बड़ा उजाला ला सकती है।