Sunday, September 13, 2026

Himachal

*हिमाचल प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने नाथू ला में भारतीय सेना के शौर्य और सीमा क्षेत्र के विकास को करीब से जाना*

September 13, 2026 05:04 PM

*हिमाचल प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने नाथू ला में भारतीय सेना के शौर्य और सीमा क्षेत्र के विकास को करीब से जाना*

*1967 के ऐतिहासिक संघर्ष और जाट रेजिमेंट की वीरता से रूबरू हुए पत्रकार*

*‘रणभूमि’ परियोजना से सीमावर्ती क्षेत्रों के इतिहास और सैन्य विरासत को पर्यटन से जोड़ने की पहल*

*सिक्किम, सितम्बर *
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय, शिमला द्वारा आयोजित हिमाचल प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल के सिक्किम दौरे के तीसरे दिन प्रतिनिधिमंडल ने आज सामरिक रूप से महत्वपूर्ण *नाथू ला दर्रे* का दौरा किया। 11 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान भारत-चीन सीमा क्षेत्र की भौगोलिक एवं सामरिक परिस्थितियों, भारतीय सेना की भूमिका तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में किए जा रहे विकास कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझा।

नाथू ला में भारतीय सेना के अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को एक संक्षिप्त प्रस्तुति के माध्यम से क्षेत्र के इतिहास, सामरिक महत्व, सीमा प्रबंधन तथा यहां तैनात सैनिकों के सामने आने वाली चुनौतियों की जानकारी दी। पत्रकारों को बताया गया कि अत्यधिक ऊंचाई, कम ऑक्सीजन स्तर और कठिन मौसम परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सेना के जवान देश की सीमाओं की सुरक्षा में निरंतर तैनात रहते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने सीमा क्षेत्र में विकसित बुनियादी सुविधाओं तथा विकास कार्यों को भी करीब से देखा।

अधिकारियों ने बताया कि नाथू ला का महत्व केवल सामरिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और व्यापारिक दृष्टि से भी रहा है। सिक्किम के भारत में विलय से पहले यह भारत, तिब्बत और चीन के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग था तथा ऐतिहासिक सिल्क रूट से जुड़ा रहा है। वर्तमान में भी नाथू ला भारत की सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

*सीमा पर शांति और संवाद में BPM की महत्वपूर्ण भूमिका*

प्रतिनिधिमंडल को भारत और चीन के बीच सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए आयोजित होने वाली *Border Personnel Meetings (BPMs)* के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच नियमित संवाद और समन्वय के लिए वर्ष में आठ BPM आयोजित की जाती हैं। इनमें पांच की मेजबानी भारत और तीन की मेजबानी चीन द्वारा की जाती है। ये बैठकें सीमा पर संवाद, समन्वय और आपसी समझ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

*1967 के ऐतिहासिक संघर्ष और जाट रेजिमेंट की वीरता की जानकारी*

नाथू ला दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल को वर्ष *1967 के ऐतिहासिक संघर्ष* से जुड़ी घटनाओं की भी जानकारी दी गई। पत्रकारों को उस समय की परिस्थितियों तथा भारतीय सैनिकों द्वारा प्रदर्शित साहस और दृढ़ संकल्प के बारे में बताया।

प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि वर्ष 1967 में नाथू ला में तारबंदी के दौरान भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गंभीर टकराव हुआ था। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सैनिकों ने दृढ़ता के साथ अपनी स्थिति का बचाव किया और प्रभावी जवाब दिया। सैन्य विवरण के अनुसार, इस संघर्ष में *लगभग 400 चीनी सैन्यकर्मी मारे गए*। भारतीय सेना ने अपनी स्थिति को मजबूती से कायम रखा और इस संघर्ष ने क्षेत्र में भारत की दृढ़ सैन्य स्थिति को रेखांकित किया। 1967 की यह घटना भारतीय सेना के इतिहास में साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में दर्ज है।

*‘रणभूमि’ परियोजना से सीमावर्ती विरासत को मिलेगा नया आयाम*

मीडिया प्रतिनिधिमंडल को केंद्र सरकार की प्रस्तावित *‘रणभूमि’ (Ranbhoomi) परियोजना* की अवधारणा के बारे में भी जानकारी दी गई। परियोजना का उद्देश्य देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के गौरवशाली सैन्य इतिहास, वीरता की गाथाओं और सामरिक महत्व को पर्यटन से जोड़ना है।

इस पहल के माध्यम से घरेलू और विदेशी पर्यटकों को सीमावर्ती क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ भारतीय सेना के साहस, बलिदान और राष्ट्रसेवा से जुड़ी ऐतिहासिक गाथाओं से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और ऐतिहासिक विरासत को भी नई पहचान मिलने की संभावना है।

*बाबा हरभजन सिंह मंदिर पहुंचे मीडिया प्रतिनिधिमंडल के सदस्य*

नाथू ला क्षेत्र की यात्रा के दौरान मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने *बाबा हरभजन सिंह मंदिर* का भी दौरा किया। पत्रकारों ने बाबा हरभजन सिंह से जुड़ी सैन्य परंपराओं, उनके जीवन से संबंधित घटनाओं तथा क्षेत्र में प्रचलित लोक आस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की। यह स्थल भारतीय सेना के जवानों के बीच कर्तव्य, समर्पण और देशभक्ति की भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। मीडिया दल ने छांगू लेक में अपशिष्ट प्रबंधन,झील के संरक्षण और इसके महत्व की जानकारी भी हासिल की।

नाथू ला और बाबा हरभजन सिंह मंदिर की यात्रा ने हिमाचल प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल को सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों, उनके सामरिक एवं ऐतिहासिक महत्व तथा कठिन परिस्थितियों में भारतीय सेना द्वारा निभाई जा रही राष्ट्रसेवा को करीब से समझने का अवसर प्रदान किया।

मीडिया दौरे का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास और आधारभूत संरचना, सामरिक महत्व, सैन्य विरासत तथा स्थानीय इतिहास से जुड़े विषयों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझना और इनसे संबंधित जानकारी को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाना है।

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