पर्यावरण संरक्षण को लेकर निकाली जा रही पदयात्रा का स्वागत, पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण को मिले प्राथमिकता: रवि ठाकुर
लाहौल-स्पीति: पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से निकाली जा रही पदयात्रा का लाहौल-स्पीति में स्वागत किया गया। रवि ठाकुर ने पूज्य खमट्रुल रिम्पोछे जी, सोमा रिम्पोछे जी एवं कट्रक रिम्पोछे जी के नेतृत्व में आयोजित इस पदयात्रा में सहभागिता कर पदयात्रियों का स्वागत किया।
दारचा से शुरू हुई यह पदयात्रा लाहौल-स्पीति के विभिन्न क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ रही है। इसके माध्यम से स्थानीय लोगों और पर्यटकों को हिमालय, ग्लेशियरों, जलस्रोतों, जीव-जंतुओं तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पदयात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों को सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश भी दिया जा रहा है।
इस अवसर पर रवि ठाकुर ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण और मानव जीवन का गहरा एवं अटूट संबंध है। नदियां, ग्लेशियर, जलस्रोत, खेत-खलिहान और जैव विविधता आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता और सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा लाहौल-स्पीति में पर्यटन और संपर्क सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बेहतर संपर्क सुविधाओं और बढ़ते पर्यटन से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। हालांकि, पर्यटन के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी और बढ़ जाती है।
रवि ठाकुर ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से आग्रह किया कि पर्यटन विकास के साथ-साथ शौचालय, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, पेयजल, पार्किंग और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के सुदृढ़ होने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा प्राकृतिक पर्यावरण पर अनावश्यक दबाव को कम किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि लाहौल-स्पीति का विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरण, संस्कृति और समृद्ध विरासत भी सुरक्षित रहे। इसके लिए सरकार, प्रशासन, स्थानीय समुदाय और पर्यटकों सहित सभी हितधारकों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए मिलकर प्रयास करने होंगे।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने वाली इस पदयात्रा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हिमालय को सुरक्षित रखना केवल स्थानीय लोगों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।