भारत विश्व का सबसे बड़ा और सशक्त लोकतंत्र: कुलदीप पठानियां
शिमला। राजकीय महाविद्यालय चुवाड़ी, जिला चंबा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला स्पाटू, जिला सोलन, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टूटीकंडी, सेंट बीड्स कॉलेज संजौली तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बलदया, जिला शिमला के करीब 210 छात्र-छात्राओं ने बुधवार को पूर्वाह्न 10:30 बजे हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय पहुंचकर कौंसिल चैंबर के बाहर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां से मुलाकात की। इस दौरान पठानियां ने विद्यार्थियों को संसदीय प्रणाली, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पठानियां ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर हैं। उन्होंने बताया कि लोकसभा के लिए सांसदों के चुने जाने के बाद लोकसभा का गठन होता है और जिस दल के पास बहुमत होता है, वह केंद्र में सरकार बनाता है। बहुमत प्राप्त दल अपने नेता का चुनाव करता है, जो देश का प्रधानमंत्री बनता है और इसके बाद मंत्रिपरिषद का गठन किया जाता है। उन्होंने बताया कि राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से विधानसभा सदस्यों द्वारा किया जाता है। वर्तमान में लोकसभा में 543 सदस्य, जबकि राज्यसभा में 245 सदस्य हैं। इनमें 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। लोकसभा का कार्यकाल पांच वर्ष और राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष होता है। राज्यसभा को उच्च सदन तथा लोकसभा को निम्न सदन कहा जाता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को हिमाचल में विधान परिषद के प्रावधान की जानकारी देते हुए कहा कि बड़े राज्यों में विधान परिषद भी होती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश छोटा राज्य होने के कारण यहां विधान परिषद नहीं है।
कौंसिल चैंबर से जुड़ा है देश के इतिहास का गौरव
सेंट बीड्स कॉलेज की छात्राओं से संवाद करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कौंसिल चैंबर के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस भवन का निर्माण वर्ष 1920 में शुरू हुआ और 1925 में पूरा हुआ। इसके निर्माण में पांच वर्ष लगे और उस समय इस पर करीब 10 लाख रुपये खर्च हुए थे। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने इसका निर्माण कौंसिल चैंबर के रूप में करवाया था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय असेंबली के लिए एक समर्पित भवन उपलब्ध करवाना था।
पठानियां ने बताया कि फ्रेडरिक व्हाइट राष्ट्रीय असेंबली के पहले नामित स्पीकर थे, जबकि वर्ष 1925 में विट्ठल भाई पटेल ने अपने ब्रिटिश प्रतिद्वंद्वी को दो मतों से हराकर इसी सदन में राष्ट्रीय असेंबली के पहले निर्वाचित स्पीकर बनने का गौरव हासिल किया था। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक भवन कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। महिलाओं को मताधिकार देने और भारत छोड़ो प्रस्ताव से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं भी इसी सदन से जुड़ी हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि सदन के भीतर जिस आसन पर वह बैठते हैं, वह कुर्सी भी वर्ष 1925 में वर्मीज सरकार द्वारा तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को उपहार स्वरूप दी गई थी। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी छात्र-छात्राओं को सदन की कार्यवाही देखने के लिए आमंत्रित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।